

|
अनुसंधान तथा विकास सहायक सेवाएं (आर डी एस)
कम्प्यूटर केन्द्र तथा डाटा प्रबंध (सी डी एम)
· कम्प्यूटर जालतंञ (लैन) · एण्टीवायरस सपोर्ट · इण्टरनेट सेवाएं · ई-मेल सेवाएं · हार्डवेयर एण्ड साफटवेयर रखरखाव · इण्टरनेट तथा इण्ट्रनेट विकास · कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम · अनुप्रयोग साफटवेयर विकास · तकनीकी विनिर्देश तथा हार्डवेयर एवं साफटवेयर का मूल्यांकन · सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना आयोजना · वेबसाइट विकास एवं रखरखाव · प्रशासनिक आंकड़ा आधार (डाटाबेस)
प्रलेखन एवं पुस्तकालय सेवाएं
· मासिक प्रलेखन · ग्रंथावली का प्रसार · सूचना का प्रसार · संदर्भ सेवाएं · प्रलेख सप्लाई सेवाएं · उपयोगकर्ता शिक्षा तथा प्रशिक्षण, जिराक्सिंग, प्रकाशन, जिल्द सेवाएं · पुस्तक, प्रकाशन संग्रह विकास · तकनीकी प्रोसैसिंग परिचालन तथा आपसी पुस्तकालय सेवाएं · प्रोफैशनल विकास · अन्तर्राष्ट्रीय आंकड़ा आधार पहुंच (एक्सेस) · पुस्तकालय का कम्प्यूटरीकरण
मैकेनिकल अभियांत्रिकी सेवाएं (एमईएस) :
प्रभाग आर एण्ड डी प्रभागों द्वारा अपेक्षित विशेष उपस्करों से संबंधित परिवहन वाहनों जिसमें आर एण्ड डी उपकरण लगे हुए हों (यांत्रिकृत वाहन) के अभकिल्प, विकास, रचना, मरम्मत तथा रखरखाव कार्यों के माध्यम से तकनीकी निवेश प्रदान करता है । प्रभाग में विभिन्न प्रकार की भारी तथा हल्की मशीनों के अतिरिक्त काम करने के लिए कुशल तथा समर्पित स्टाफ है ।
इस समूह के द्वारा आर एण्ड डी के अतिरिक्त अवसंरचनात्मक समूहों जिसमें प्रशासन भी सम्मिलित है दोनों की वाहन आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है । आर एण्ड डी परियोजनाओं में मैके निकल निवेश के लिए कुच्छेक स्टाफ सदस्य सक्रिए योगदान दे रहे हैं ये निवेश अनेकों आर एण्ड डी प्रभागों के लिए महत्वपूर्ण हैं ।
यांत्रिकरण प्रभाग
यांत्रिकरण का विकास निर्माण गुणवता के मूल्यांकन के लिए अपेक्षित यांत्रिकरण के लिए स्वदेशी विकास तथा अभिकल्प, प्रतिबल तथा विकृति मापने का उपस्कर, विकृति, प्रतिबल, दरार मापने के लिए आप्टिकल फाइबर आधारित गेज, आप्टिकल फाइबर के माध्यम से तापमान तथा आर्द्रता मापना, सड़क विशेषताओं के सूचीकरण के लिए सड़क स्थिति मानिटरिंग प्रणाली, पहिया भार के अन्तर्गत कुटि्टम विक्षेप मापना, यातायात काउंटर तथा वर्गीकारक प्रणाली, नान कान्टेक्ट दूरी मीटर, पुश बटन पद्वति संकेत नियन्त्रक, लेजर तथा इन्फ्रारेड प्रणाली पर आधारित गति प्रवर्तन उपस्कर । |





|
वी डब्लू संवेदक का प्रतिष्ठापन → |