1950-1959    1960-1969    1970-1979    1980-1989    1990-1999    2000-2005

· बाढ़ प्रमुख क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों के निर्माण की नई विधि विकसित की गई जिसमें अल्‍प सीमेंट उड़न राख आधार पर अल्‍प सीमेंट गुज्‍झी द्वारा अन्‍त:संबंधित पूर्व निर्मित कंक्रीट ब्‍लाक पगडंडी के साथ-साथ बिछाए गए । इस प्रकार पगडंडी रास्‍ते लम्‍बे समय तक बाढ़ के पानी में डूबे रहने पर भी अप्रभावित   रहे ।

· भारत में बुनियादी (प्राइमरी) सड़क जालतंत्र की सड़क ज्‍यामितीय तथा सतह विशिष्‍टताओं पर अध्‍ययन किया गया । अध्‍ययन के अन्‍तर्गत 67 राष्‍ट्रीय महामार्ग पर फैली 31,700 कि.मी. लम्‍बाई का सूचीकरण सम्मिलित था । प्रत्‍येक कि.मी. के लिए रूक्षता, क्षैतिज वक्रता तथा उर्ध्‍वाधर प्रोफाइल डाटा एक‍त्रि‍त करने के लिए यंत्रीकृत कार का प्रयोग किया गया । कुट्टिम स्थिति, चौड़ाई, सतह प्रकार पर अन्‍य डाटा भी सूचीकृत किया गया ।

· 1983 में डा. एम पी धीर ने नए निदेशक के रूप में पदभार सम्‍भाला ।

· 0.27 कि.ग्रा./एम2 तक रन्‍ध्र जलदाब मापने के लिए कैसाग्रैनेड पीजोमीटर का सुधरा रूप विकसित किया गया

· त्रि-अक्षीय सैल का सुधार किया गया जिसका प्रयोग क्षैतिज तथा उर्ध्‍वाधर दोनों दिशाओं में उभार दाब मापने के लिए किया जाता है ।

· 19 राष्‍टी्य हवाई अडडों को उनकी धावन-पट्टी (रनवे)कुट्टिम दृढ़ीकरण के लिए आंकलित किया गया । भारतीय विमान पतन (एयरपोर्ट) प्राधिकरण के अनुरोध पर 1987-89 के दौरान परियोजना ली गई ।

· विभिन्‍न राज्‍यों तथा राष्‍ट्रीय महामार्गो पर धुरी भार सर्वेक्षण मैकेनिकल भार सेतु का प्रयोग करते हुए पूरा किया गया । इस अध्‍ययन का उद्देश्‍य देश के विभिन्‍न क्षेत्रों में विभिन्‍न महामार्गो पर अधिभार का निर्धारण करना था ।

· सेतुओं का भार वहन क्षमता परीक्षण विभिन्‍न नवीन विधियों का प्रयोग करते हुए किया गया । तेजपुर में ब्रहमपुत्र सेतु तथा जम्‍मू श्री नगर राष्‍ट्रीय महामार्ग पर आर सी सी सेतु का परीक्षण किया गया ।

· सेतुओं के इलैक्ट्रिक धारण परीक्षण से एकत्रि‍त डाटा से आइ आर सी के लिए (कोड ऑफ प्रौक्टिस) प्रक्रिया संहिता बनाई गई ।

· बाह्य पूर्व-प्रतिबल विधि का प्रयोग करते हुए पुरातन ठाने क्रीक सेतु की भार वहन क्षमता को पुन:स्‍थापित किया गया ।

आवास / होस्‍टल

1980-1989 के दौरान की मुख्‍य घटनाएं :

के.... जलपानग्रह

बम्‍प इंटीग्रेटर के साथ जुडी यांत्रि‍कृत वैन